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संस्कृति विभाग और स्पीक मैके ने चित्रकूट में किया सितार वादन कार्यक्रम का आयोजन

admin
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चित्रकूट। संस्कृति विभाग उत्तर प्रदेश के भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय तथा स्पीक मैके संस्था के संयुक्त तत्वावधान में चित्रकूट में विगत चार दिनों से शास्त्रीय संगीत की विभिन्न सभाए संपन्न हुई। इस कार्यक्रम में मुख्य कलाकार  सितार की प्रसिद्ध वादिका उस्ताद शाहिद परवेज खान की शिष्या तथा ऑल इंडिया रेडियो की टॉप ग्रेट आर्टिस्ट विदुषी डॉक्टर श्रावणी विश्वास ने सितार वादन के द्वारा सभी को शास्त्रीय संगीत से परिचित कराया। आपके साथ तबला संगत काशी हिंदू विश्वविद्यालय के संगतकार श्री ज्ञान स्वरूप मुखर्जी ने किया तथा तानपुरा पर यश सोनकर ने संगत की।
कार्यक्रम का शुभारंभ चित्रकूट में ग्रामोदय विश्वविद्यालय से हुआ इसके पश्चात सी पी सिंह आवासीय विद्यालय पुनः दूसरे दिन श्री जयेंद्र सरस्वती वेद विद्यालय सेठ की बगिया और वेद विद्यालय गायत्री शक्तिपीठ में आपका सितार वादन हुआ। तीसरे दिन यह कार्यक्रम गोस्वामी तुलसीदास राजकीय महाविद्यालय तथा जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग राज्य विश्वविद्यालय में संपन्न हुआ। इसी क्रम में चौथे दिन चित्रकूट इंटर कॉलेज कर्वी तथा जीजीआईसी कर्वी में सितार वादन का कार्यक्रम संपन्न हुआ।  विद्यार्थियों ने इस कार्यक्रम को बहुत सराहा और उन्होंने यह कहा कि अभी तक अपने जीवन में लाइव सितार का कार्यक्रम उन्होंने नहीं देखा था । डॉक्टर श्रावणी विश्वास ने सितार पर शास्त्रीय रागों को अवतरित करते हुए उसके लाभ से परिचित कराया। तत्पश्चातअनेका धुनों में भी रागों के संयोजन के विषय में विद्यार्थियों को बताया। राग ताल लय इन सभी पर एक व्याख्यात्मक प्रस्तुति देते हुए डॉक्टर श्रावणी जी ने सभी को कार्यक्रम से लाभान्वित किया।  संपूर्ण कार्यक्रम के संयोजक के रूप में पंडित बिरजू महाराज कथक संस्थान के सदस्य जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग राज्य विश्वविद्यालय के संगीत वाद्य विभाग के विभाग अध्यक्ष डॉक्टर गोपाल मिश्रा ने कार्यक्रम को सफलतापूर्वक संपादित किया। डॉ मिश्रा ने बताया कि प्रायः प्रत्येक विद्यालय के छात्रों ने यह बात स्वीकार की कि उन्होंने अपने जीवन में अब तक कभी लाइव सितार का कार्यक्रम नहीं सुना है। इस प्रकार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए डॉक्टर मिश्रा ने स्पीक मैके का धन्यवाद दिया और संस्कृति विभाग के इस पहल को सराहा।  डॉक्टर मिश्रा ने बताया कि मुख्यमंत्री की ऐसी योजना है की संगीत एवं कला के माध्यम से अपने संस्कृति का संरक्षण और संवर्धन किया जाए। अपनी संस्कृति से युवाओं को परिचित कराकर उन्हें उस पर गर्व करने वाली अनुभूति कराई जाए। इसी उद्देश्य से स्पीक मैके  के साथ मिलकर इस कार्यक्रम को पूरे प्रदेश में आयोजित किया गया जिसमें चित्रकूट धाम में भी यह कार्यक्रम आयोजित हुआ।  विद्यार्थियों ने इस कार्यक्रम को सराहा और अनेक छात्राओं ने डॉक्टर श्रावणी जी से इस विषय पर चर्चा की कि संगीत कैसे सीखना चाहिए कब सीखना चाहिए और किस प्रकार से सीखने से संगीत आता है । कार्यक्रम की सफलता का श्रेय समस्त विद्यालयों महाविद्यालय व विश्वविद्यालय के प्रशासन को प्रदान करते हुए डॉक्टर मिश्रा ने बताया कि बच्चों ने अत्यंत अनुशासन के साथ शास्त्रीय संगीत का श्रवण किया और उससे लाभान्वित हुए। भविष्य में भी संस्कृति विभाग और स्पिक मैके के द्वारा ऐसे आयोजन कार्यशालाएं आयोजित की जाएगी जिससे युवाओं और छात्रों का मार्गदर्शन हो। उनकी रुचि पाश्चात्य संगीत की अपेक्षा अपनी संस्कृति सभ्यता से युक्त भारतीय संगीत में बढ़े इस उद्देश्य से ऐसी आयोजन और भी किए जाएंगे।

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