कानपुर नगर ब्यूरो। जहां एक ओर लगातार सरकार और जनपद में सराहनीय कार्य करने वाले जिलाधिकारी स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर करने के लिए विभाग में लगातार औचक निरीक्षण कर रहे हैं। वहीं गरीबों को आसानी से अच्छे अस्पताल में इलाज मुहैया हो सके इसके लिए सरकार द्वारा बनाये गए आयुष्मान सेल में डॉक्टर तो हैं पर इस वक़्त कुछ विभाग के लोग मनमाने तरीके से आयुष्मान कार्ड के लाभार्थियों को लाभ न मिल सके इसपर कार्य कर रहे हैं वो भी सिर्फ अपनी जेब भरने के लिए। सम्भवतः बहुत जल्द जनपद के अधिकारी ऐसे लोगों पर सख्त कार्यवाही कर सकते हैं। जांच का विषय तो यह है कि विभाग की टीम के एक सदस्य ने आयुष्मान कार्ड अस्पताल में दिलाने को लेकर उसको अपनी कमाई का अड्डा बना लिया। हद तो तब हो गई जब आयुष्मान से अस्पतालों को जोड़ने के लिए संचालक से 5 से 10 लाख रुपए व उपहार में सोने की जंजीर और लैपटॉप की डिमांड की जाने लगी है। मनमानी तो इतनी कि अगर उसकी डिमांड पूरी नहीं की तो चैलेंज के साथ उसको आयुष्मान ना दिलाने की कवायत शुरू कर दी जाती है। और उसका रसूक भी इतना है कि होता भी वही है कितना भी मानक पूरे कर ले पर चिकित्सालय को आयुष्मान से नहीं जोड़ा जाता। जिससे जो अस्पताल संचालक आयुष्मान से लोगों को सुविधा दे सकते हैं वह उससे वंचित हो जाते हैं। आश्चर्य तो तब है कि इतनी कम सैलरी होने के बाद भी विभाग में डॉक्टर के पद पर तैनात इन महोदय की लखनऊ में करोड़ों की संपत्ति अचानक निकल आती है। जिसमें फ्लैट ,प्लांट एवं अन्य कई व्यापार भी शामिल है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार हद तो तब है जब लेनदेन की प्रक्रिया चिकित्सालियों के संचालकों से अकाउंट से दिलाई जाती हैं। ऑनलाइन लेने देने की प्रक्रिया एवं मनमानी ढंग से आयुष्मान योजना जैसे जनता की लाभकारी योजनाओं में भी ऐसे षड्यंत्र एवं सेंधमारी करना ऐसे कर्मचारी और डॉक्टर की शक्ति और राजनीतिक पहुंच आश्चर्यचकित करने वाला है। करोड़ों की संपत्ति एवं संविदा के पद पर नियुक्त होते हुए भी सरकारी आवास में निवास करना एवं वसूली का अड्डा सरकारी संपत्ति को बनाना अब इनके लिए आम हो गया है। चिकित्सालय के प्रबंधक एवं संचालक इनके खिलाफ प्रदेश के उपमुख्यमंत्री/ स्वास्थ्य मंत्री के संज्ञान में लाने की तैयारी में है देखते हैं क्या ऐसे कर्मचारियों के खिलाफ भी कार्रवाई होना संभव है या लीपा पोती करके जस के तस सरकारी योजनाओं में यह कर्मचारी ऐसे ही सेंध लगाते रहेंगे।



