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राष्ट्रऋषि नानाजी के बौद्धिक विचारों से प्रेरणा ले युवा पीढ़ी- राज्यपाल मंगुभाई पटेल

admin
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चित्रकूट। महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय का 13वां दीक्षांत समारोह विश्वविद्यालय के दीक्षांत प्रांगण में शनिवार को परम्परागत गरिमा, उल्लास और उत्साह के साथ आयोजित किया गया। जिसमें विश्वविद्यालय के कुलाधिपति और दीक्षांत समारोह के अध्यक्ष मध्यप्रदेश के राज्यपाल मंगू भाई पटेल ने 37 विद्यार्थियों को शोध उपाधि, उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 35 विद्यार्थियों को पदक और एक विद्यार्थी को नानाजी मेडल प्रदान किया।
दीक्षांत समारोह में विश्वविद्यालय के कुलाधिपति मंगू भाई पटेल ने नानाजी देशमुख के कार्यों का पुण्य स्मरण करते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान देना नहीं, बल्कि वंचित समुदाय के उन्नति का मार्ग प्रशस्त करना भी है। उन्होंने उपाधि धारकों से कहा कि नानाजी देशमुख के बौद्धिक विचारों से प्रेरणा लेकर अपने जीवन की दिाा तय करें और सुखी तथा समृद्धि जीवन की ओर अग्रसर हो। मध्य प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि ग्रामोदय विश्वविद्यालय की नींव रखने वाले राष्ट्र ऋषि नानाजी देशमुख ने समाज के परिवर्तन के लिए चित्रकूट को अपनी कर्मभूमि बनाया। विद्यार्थियों से कहा कि सत्य निष्ठा और परिश्रम से की गई पढ़ाई पूरे देश की संपत्ति है। राष्ट्रीय सचिव शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास डॉ अतुल कोठारी ने कहा कि किसी भी विद्यार्थी के लिए यशस्वी और सार्थक जीवन का अर्थ है कि वह अपने व्यवसायी जीवन में सफलता प्राप्त करके स्वयं के परिवार का निर्वाह करते हुए समाज के लिए भी कुछ योगदान करने में सक्षम बनें ताकि वह समाज राष्ट्र और मानवता के कल्याण में अपना योगदान देने के लिए हमेशा तत्पर रहे।
दीनदयाल शोध संस्थान के संगठन सचिव अभय महाजन ने कहा कि भारत रत्न नानाजी देशमुख द्वारा स्थापित ग्रामोदय विश्वविद्यालय में समाज परिवर्तन के संकल्प को लेकर व्यक्तित्व का निर्माण किया जा रहा है। विद्यार्थियों से कहा कि समय के अनुसार अपने को पहचाने और हर मामले में स्वदेशी बने। विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. भरत मिश्रा ने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा, शोध, प्रसार और प्रशिक्षण के परम्परागत आयामों के साथ-साथ संसाधन सृजन का नया आयाम जुडा है। बताया कि राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नेक) द्वारा विश्वविद्यालय को ए डबल प्लस ग्रेड से सम्मानित किया गया है। साथ ही विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा श्रेणी एक के रूप विश्वविद्यालय को स्वायत्तता का स्तर प्रदान किया है। कहा कि विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता, गुणवत्ता एवं नवाचारों का प्रमाण है। कहा कि व्यावसायिक एवं कौशल आधारित पाठ्यक्रमों को अंगीकार करते हुए युवाओं को शिक्षा  के साथ-साथ स्वरोजगार एवं आत्मनिर्भरता की ओर उन्मुख करने का सतत प्रयास किया जा रहा है। इस दौरान उन्होंने उपाधि धारकों को दीक्षांत शपथ दिलाई। दीक्षांत समारोह का संचालन डॉ ललित कुमार सिंह ने किया।
इस दौरान राज्यपाल ने विद्यार्थियों व डीआरआई द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन किया तथा राज्य कृषि विपणन बोर्ड मध्य प्रदेश द्वारा नवनिर्मित किसान भवन के प्रथम तल का लोकार्पण किया। दीक्षांत समारोह में विश्वविद्यालय के नियमित पाठ्यक्रम में 799 उपाधियां विद्यार्थियों को प्रदान की गई। जिनमें 762 स्नातक और स्नातकोत्तर तथा 37 पीएचडी की उपाधि में शामिल हैं। कृषि संकाय की दिशा साहू को नानाजी देशमुख स्मृति स्वर्ण पदक प्रदान किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के दूरवर्ती अध्ययन एवं सतत शिक्षा केन्द्र में 5310 स्नातकोत्तर, 3758 स्नातक तथा मुख्यमंत्री नेतृत्व क्षमता विकास पाठ्यक्रम के 3414 स्नातकों और 12341 स्नातकों को उपाधियां प्रदान की गई।
इस मौके पर कुलसचिव प्रो आरसी त्रिपाठी, प्रबंधक मंडल के सदस्य डॉ आरपी सिंह, डॉ एनके जैन, प्रो टीआर शर्मा, शिव कुमार सिंह सोमवंशी, डॉ पूर्णिमा दाते, इं. ब्रजेश कुमार शुक्ल, डॉ राकेश बाजपेई, विवेक विनायक राव, विजय पाल सिंह यादव, धर्मेंद्र सिंह बिसेन, मुकुंद तिवारी, विद्या परिषद सदस्य प्रो प्रमोद कुमार पांडेय, विश्वविद्यालय के प्रो डीपी राय, अधिष्ठाता प्रो नन्दलाल मिश्रा, डॉ आञ्जनेय पांडेय, प्रो एस के चतुर्वेदी, प्रो अमरजीत सिंह, डॉ कमलेश कुमार थापक आदि मौजूद रहे।
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