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जियो पार्क स्थापना को लेकर विशेषज्ञों की टीम ने स्थानीय लोगों के साथ की बैैठक

admin
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जियो पार्क स्थापना को लेकर विशेषज्ञों की टीम ने स्थानीय लोगों के साथ की बैैठक
चित्रकूट। यूनेस्को ग्लोबल जियोपार्क विशेषज्ञ डॉ. अली रेजा अमरी काजमी के नेतृत्व में स्थलीय निरीक्षण के लिए जनपद के दौरे पर आए विशेषज्ञों के दल ने बुधवार को स्थानीय निवासियों के साथ बैठक की। जिसमें विशेषज्ञों ने स्थानीय लोगों ने जियो पार्क के फायदों से लेकर संरक्षण की चुनौतियों तक हर पहलू पर चर्चा की।
स्थलीय निरीक्षण के लिए जनपद दौेरें में आए विशेषज्ञों के दल में शामिल पूर्व डिप्टी डायरेक्टर जनरल जीएसआई डॉ. सतीश त्रिपाठी, मध्य प्रदेश पर्यटन के संयुक्त निदेशक प्रशांत सिंह बघेल, पर्यावरणविद् और जियोपार्क समन्वयक डॉ. अश्वनी अवस्थी और डीएसएन कॉलेज उन्नाव के प्रोफेसर डॉ. अनिल साहू  ने यूनेस्को ग्लोबल जियो पार्क विशेषज्ञ डॉ. अली रेजा अमरी काजमी के नेतृत्व में पहले दो दिनों में चित्रकूट की कई महत्वपूर्ण जगहों का दौरा किया। इसके बाद बुधवार को चित्रकूट के लोगों से सीधा संवाद किया। बैठक में राजनीतिक, सामाजिक कार्यकर्ता, किसान, युवा और महिलाओं को शामिल किया गया। जिसमें डॉ. अली रेजा अमरी काजमी ने सबसे पहले जियोपार्क की अवधारणा को सरल शब्दों में समझाया और बताया कि भारत में चित्रकूट जियो पार्क के लिए सबसे बेहतरीन उम्मीदवार है। बताया कि जियो पार्क सिर्फ भू विरासत स्थलों से संबंधित नहीं है, बल्कि यह स्थानीय लोगों के जीवन को बेहतर बनाने का माध्यम है। उन्होंने ईरान के केशम द्वीप मे विकसित जियो पार्क का उदाहरण देते हुए बताया कि जियोपार्क से पर्यटन, रोजगार और स्थानीय हस्तशिल्प या कृषि उत्पादों को बाजार मिलेगा।
अश्वनी अवस्थी ने कहा कि चित्रकूट में जियोपार्क बनाना सिर्फ सरकार की जिम्मेदारी नहीं है। इसमें चित्रकूट वासियों की भी उतनी ही जिम्मेदारी है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे जागरूकता फैलाएं, कचरा न फेंकें और स्थानीय धरोहरों की देखभाल करें। डॉ. सतीश त्रिपाठी ने कहा कि चित्रकूट में जियो पार्क का बनना सिर्फ भू-स्थलों के संरक्षण को बढ़ावा नहीं देगा, बल्कि भगवान श्रीराम से जुड़े इन स्थलों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दिलाएगा। डीएसएन कॉलिज उन्नाव के प्रोफेसर डॉ. अनिल साहू ने संरक्षण की एक गंभीर समस्या पर चर्चा करते हुए कहा कि चित्रकूट में 2,000 मिलियन वर्ष पुराने स्ट्रोमेटोलाइट्स हैं, जो पृथ्वी पर सबसे पुराने जीवन के निशान हैं। अपील की कि इसके संरक्षण में मदद करें। जैसे कि कुंड के आसपास सफाई रखें और अवैध गतिविधियों की रिपोर्ट करें।

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