- कथा व्यास अनुज शास्त्री (अन्नू भैया) ने कराया अमृतमयी कथा का रसपान
चित्रकूट। कामदगिरि परिक्रमा मार्ग स्थित श्री राम जानकी मंदिर में आयोजित झूला महोत्सव व श्रीमद भागवत कथा के विश्राम दिवस पर कथा व्यास अनुज शास्त्री (अन्नू भैया) के मुखार बिंद से कृष्ण-सुदामा का प्रसंग सुनकर श्रोता भावबिहोर हो गये।
भागवत कथा का समापन दिवस पर कथा व्यास अनुज शास्त्री (अन्नू भैया) ने श्रीकृष्ण सुदामा चरित्र का सुंदर विस्तृत वर्णन सुनाया। कृष्ण-सुदामा की मित्रता की कथा सुनकर वहां उपस्थित सैकड़ों श्रद्धालु भाव विभोर हो गए। सुदामा की दयनीय दशा और भगवान में निष्ठा के प्रसंग को सुनकर श्रद्धालुओं की आंखें भर आई। संगीतमय श्रीमद भागवत कथा के समापन अवसर पर व्यास जी ने श्रीकृष्ण सुदामा चरित्र का विस्तृत वर्णन सुनाया। उन्होंने बताया कि सुदामा के लिए धन की कोई कमी नहीं थी। सुदामा के पास विद्वता थी और धनार्जन तो सुदामा उससे भी कर सकते थे। मगर सुदामा पेट के लिए नहीं, बल्कि आत्मा के लिए कर्म कर रहे थे। वे आत्म कल्याण को प्राथमिकता देते थे। भागवत जैसा ग्रंथ एक दरिद्र को प्रसन्नात्मा जितेंद्रिय शब्द से अलंकृत नहीं कर सकता। जिसे भागवत ही परमशांत कहती हो उसे कौन दरिद्र घोषित कर सकता है। पत्नी के कहने पर सुदामा का द्वारिका आगमन और प्रभु श्रीकृष्ण द्वारा सुदामा के सत्कार पर स्वामी जी ने कहा कि यह व्यक्ति का नहीं व्यक्तित्व का सत्कार है। यह चित की नहीं चरित्र की पूजा है। सुदामा की निष्ठा और सुदामा के त्याग का सम्मान है। कथा वाचक ने बताया कि मित्रता में बदले की भावना का स्थान नहीं होना चाहिए। भागवताचार्य द्वारा भजनों के माध्यम से प्रभु की अतिकरूणा, कृपा वृष्टि की लीलाओं का श्रवण कर सभी श्रोता भावुक हो गए। इस दौरान कृष्ण-सुदामा की मनोहारी झांकी के दर्शन करने के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। भगवान कृष्ण के स्वरूप ने जैसे ही सुदामा बने स्वरूप के पैर धोए पंडाल में मौजूद श्रोता भावुक हो गए। कथा के दौरान भजनामृत की फुहार पर श्रोताओं का तन-मन झूम उठा। इस मौके पर कथा श्रवण के लिए बड़ी तादाद में श्रद्धालु कथा पंडाल में मौजूद थे। इस अवसर पर जिला सहकारी बैंक बांदा-चित्रकूट के अध्यक्ष पंकज अग्रवाल,मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा0भूपेष द्विवेदी,भाजपा नगर अध्यक्ष रवि गुप्ता,यूपी जर्नलिस्ट एसोसिएषन चित्रकूट के जिलाध्यक्ष रतन पटेल आदि सैकडों श्रोता आदि उपस्थित रहे।
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श्रीराम जानकी मंदिर में कृष्ण-सुदामा का प्रसंग सुनकर भाव विभोर हुए श्रोता
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